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Showing posts from May, 2021

ब्रह्मज्ञान का अधिकारी

एक साधक ने किसी महात्मा के पास जाकर उनसे प्रार्थना की कि 'मुझे आत्मसाक्षात्कार का उपाय बताइये। महात्मा ने एक मंत्र बताकर कहा कि ' एकांत में रहकर एक साल तक इस मंत्र का जाप करो; जिस दिन वर्ष पूरा हो, उस दिन नहाकर मेरे पास आना '. साधक ने वैसा ही किया।  वर्ष पूरा होने के दिन महात्मा जी  ने वहां झाड़ू देने वाली भंगिन से कह दिया कि  जब वह  नहा - धोकर मेरे पास आने लगे तब उसके पास जाकर झाड़ू से गर्दा उड़ाना। भंगिन ने वैसा ही किया। साधक को गुस्सा आ गया और वह भंगिन को मारने के लिए दौड़ा।  भंगिन भाग गयी। वह फिर से नहाकर महात्मा जी के पास आया। महात्माजी ने कहा-'भैया! अभी तो तुम साँप की तरह काटने दौड़ते हो। साल भर  और बैठकर मंत्र-जप करो तब आना।' साधक को बात कुछ बुरी तो लगी, पर वह गुरु  की आज्ञा समझकर चला गया और मंत्र जप करने लगा। दूसरा वर्ष जिस दिन पूरा होता था, उस दिन महात्मा जी ने उसी भंगिन से कहा कि आज जब वह आने लगे तो उसके पैरों से झाड़ू छुआ देना। उसने कहा, 'मुझे मारेगा तो?' महात्मा जी ने बोले ' आज मारेगा नहीं, बक कर ही रह जायेगा। ' भंगिन ने जाकर झाड़ू छुआ...

परमात्मा का साथ

 एक दिन में हम कितनी बार परमात्मा को याद करते.. हैं? एक या दो बार ? बाकी समय में क्या हम ईश्वर को भूल जाते हैं और यही सोचते हैं कि हम कर्ता हैं। और हमारे करने से ही सब कुछ होता है? आइये, " हम परमात्मा को हर समय याद करने की कोशिश करें। निश्चित रूप से ऐसा करने वाला हर समय, परमानंद और सदा-सदा की खुशी को पा लेगा। वह समस्याओं से ऊपर उठेगा और जीवन के उतार चढ़ाव से प्रभावित नहीं होगा। यह हमारे भीतर की ईश्वरीय शक्ति है, जो हमें चुनौतियों का सामना करने के लिए ताकत और साहस देती है। प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी समय शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी हमें आश्चर्य होता है कि क्या हम इससे बाहर निकल सकते हैं, पर जब हम उन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर लेते हैं तो हमें हैरानी होती है कि हमने यह कैसे कर लिया? इनमें से प्रत्येक अनुभव उस उच्च शक्ति का प्रमाण है, जो हमेशा हमारे साथ रहती है। हम कभी अकेले नहीं होते। परमात्मा हमेशा हमारे साथ रहते हैं। जब भी हमें किसी चुनौती का सामना करना पड़ता है, जो हमें लगता है कि बहुत मुश्किल है, तब यह ध्यान रखना चाहिए कि हम अकेले नहीं हैं, परमात...