प्यार करो पर प्यार न माँगो
प्यार करो पर प्यार न माँगो , प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, गैरो से क्या अपनों से भी सपनों का संसार न माँगो,, प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, तुम्हे दिखाई देती है जो, बसी हुई बस्ती यारो की,, धौखे में मत आ जाना, ये दुनियाँ है दुकानदारो की,,, व्यवसायी से निश्चल मन का, प्रेमभरा व्यवहार न माँगो,, प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, सोचो तनिक कामना अपनी, जीवन में दुःख-सुख भरती है,, नहीं दूसरा दोषी कोई, आशा ही निराश करती है,,, मुक्ति का उपाय सोचो, कुछ भुक्ति का भण्ङार न माँगो,, प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, जिसने जगत् बनाया जग में, उसकी ही इच्छा चलती है,, बात कभी की अलग हमेशा, दिल की दाल नहीं गलती है,,, क्षणभंगुर विषयो से सुख का, स्थायी आधार न माँगो,, प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, जग को हरि का रुप समझकर, मन में भाव भक्ति का भरदो,, हरि की सत्ता सिंधु सरित सा, अपना अहं विसर्जित कर दो,,, छुट जाएगा रोना, अपने होने का अधिकार न माँगो,, प्यार करो पर प्यार न माँगो,,, देखों फलदायी वृक्षों को, कितने नम्र रहा करते है,, फलवाले होकर पत्थर का, कठिन प्रहार सहा कर...