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शरणागति भाव

  पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे.  हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी, पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे। धरी है पाप की गठरी,  हमारे सर पे ये भारी,  वज़न पापों का है भारी,  इसे कैसे उठाऐंगे,  पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे। तुम्हारे ही भरोसे पर,  ज़माना छोड़ बैठे हैं,  ज़माने की तरफ देखो,  इसे कैसे निभाएंगे,  पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे। दर्दे दिल की कहें किससे,  सहारा ना कोई देगा,  सुनोगे आप ही मोहन,  और किसको सुनाऐंगे,  पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे। फसी है भँवर में नैया,  प्रभु अब डूब जाएगी,  खिवैया आप बन जाओ,  तो बेड़ा पार हो जाये, पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे। पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे,  हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी,  पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।

कर्म और धर्म की कहानी

कर्म और धर्म की कहानी इस कहानी में दो पात्र है देव और दनुज देव के माता-पिता शिक्षित थे। देव बचपन से ही बहुत खूबसूरत था इसलिए माता पिता ने अपने पुत्र का नाम देव रख दिया। दनुज के माता-पिता बहुत ही गरीब थे, इनका पुत्र बहुत कुरूप था इसलिए ये जिस घर मे काम करते थे उस घर के मालिक ने इनके पुत्र का नाम दनुज रख दिया, जिसका अर्थ दानव या राक्षस होता है किन्तु इनके माता-पिता को इस नाम का अर्थ नही पता था। इस कहानी का प्रारंभ एक कार्यालय से होता है और अंत भी उसी कार्यालय में होता है। कार्यालय मे देव आफिसर का काम करता है और दनुज चपड़ासी का कार्य करता है। देव चरित्र से अहंकारी है और नास्तिक भी किन्तु अपने मुह पर मुखौटा पहने रहता है, लोगों को दिखाता है की आस्तिक है और ईश्वर पर बहु आस्था रखता है। दूसरी तरफ दनुज बहुत ही मेहनती, तर्कशील और शिक्षित है किन्तु परिस्थितियां ऐसी है की उसको चपड़ासी का कार्य करना पड़ता है। देव दनुज से जलता था क्योंकि वह उतना तर्कशील नहीं है इसलिए वह दनुज को छोटी सी गलती करने पर भी बहुत डाँटता और अन्य कर्मचरियों के सामने बेइज्जत करता रहता था। देव दनुज से अपने घर का कार्य भी करवात...